Friday, 20 March 2015

दूसरी-नज़र: सामयिक चिंतन

ज्यादा समय नहीं बीता जब देश को मोदिमय मोह से घिरा देख सकते थे, इसके कारणों ओर तर्कों में ताकि-झांकी की जाएं तो एक शब्द ही मुख्यतः उभरके आता हैं 'परिवर्तन'।
ये परिवर्तनों का सफ़र किस दिशा ओर दशा की तरफ़ बढ़ रहा हैं उसका एक पहलू ये भी हैं (मेरे ख्याल से इसे हम दरकिनार करके 'मोदी के अंध भक्त' ही कहलाएंगे)।

ऐसे ही कुछ पहलुओं पर नज़र डाल रहे हैं P चिदंबरम।

Monday, 16 March 2015

बदलते मूल्य ओर दरकते कदम

आग नहीं अंगारों सा फौलादी ख्याल जब दिल में हिलोरें ले रहा हो। अरे ये तो होना ही न ! बगल में जब जादुभरी लड़की हो।

Sunday, 15 March 2015

ध्येय



 तुम जो मुस्कुरा रहे हो
क्या गम हैं जो छुपा रहे हो.....।

सत्य ही जीवन हैं सत्य ही सुख हैं सत्य ही आत्मा हैं।
किस्सा मशहूर हैं कि राजा हरिश्चंद्र ने सपने में देखा कि अपना सारा राजपाठ एक ब्राह्मण को दानसकर दिया था अगले ही दिन वह ब्रहामण आ पहुँचा तो उसे रत्न-जड़ित सिहासन पर बैठा खुद आम आदमी हो गये। वह ब्रहामण ओर कोई नहीं था खुद विश्वामित्र थे जो हरिश्चंद्र की ख्याति सुनकर कि जिनके लिये सत्य ही सब कुछ हैं, उसकी परीक्षा लेना चाहते थे।

 जीभ पर नियंत्रण नहीं होना
-जीभ पर नियंत्रण नहीं होना पहली परेशानी है। खाते समय और बोलते समय जीभ पर नियंत्रण रखा जाए तो हम कई प्रकार की परेशानियों से बच सकते हैं। खाने-पीने में स्वाद की अपेक्षा सेहत को तरजीह देनी चाहिए। ऐसी चीजों का सेवन न करें जो किसी भी प्रकार से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं। साथ ही, बोलते समय ऐसे शब्दों का उपयोग न करें, जिनसे दूसरों को बुरा लग सकता है

-परेशानियों से बचने के लिए अच्छे विचारों का होना बहुत जरूरी है। गलत सोच से मन की शांति भंग हो जाती है और अशांत मन से किए गए कामों में सफलता नहीं मिल पाती है। विचार हमारे भीतर चलते ही रहते हैं, विचारों के प्रवाह में हमारी शांति बह जाती है। अत: विचारों पर नियंत्रण होना बहुत जरूरी है।
तीसरी बात- अधिक क्रोध करना

-दूसरी बड़ी परेशानी है क्रोध। अक्सर बाहर से तो हम क्रोध को नियंत्रित कर लेते हैं, लेकिन भीतर से यह कई बीमारियों को जन्म दे जाता है। क्रोध इंसान का सबसे बड़ा शत्रु है और इसके आवेश में हम सही-गलत का भेद भी भूल जाते हैं। क्रोध पर नियंत्रण कर लिया जाए तो जीवन में शांति और आनंद आ सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए ध्यान-योग और आध्यात्म की मदद ली जा सकती है।