Friday, 20 March 2015

दूसरी-नज़र: सामयिक चिंतन

ज्यादा समय नहीं बीता जब देश को मोदिमय मोह से घिरा देख सकते थे, इसके कारणों ओर तर्कों में ताकि-झांकी की जाएं तो एक शब्द ही मुख्यतः उभरके आता हैं 'परिवर्तन'।
ये परिवर्तनों का सफ़र किस दिशा ओर दशा की तरफ़ बढ़ रहा हैं उसका एक पहलू ये भी हैं (मेरे ख्याल से इसे हम दरकिनार करके 'मोदी के अंध भक्त' ही कहलाएंगे)।

ऐसे ही कुछ पहलुओं पर नज़र डाल रहे हैं P चिदंबरम।

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