Tuesday, 19 May 2015

गुरुजी ओर न्याय

जुगाङ करने पर कल का अखबार आज पढने को नसीब हुआ। बङा खुश था पुराना अखबार पाकर भी, पर खुशी क्षणिक थी पहली खबर पूरी पढ ही नहीं पाया था की नजर अलग फ्रेम की हुई एक टिप्पणी पर पङी, उसका शीर्षक था 'गुरुजी ही ले डूबेंगे चेलों को'।
खबर पढने से पहले दिमाग में आया भारत तो गुरुओं का देश है फिर भी ऐसा क्या संकट आया गुरुजी पर,आगे देखा तो कहानी समझ में आयी, घटना कुछ यूँ थी

"जम्मू कश्मीर में एक गांव में सरकारी स्कूल के गुरुदेव पर बच्चों के अभिभावकों ने कोर्ट में केस कर दिया की गुरुजी ही बच्चों का भविष्य तबाह कर रहे है।
कोर्ट में जज साहब ने गुरुजी का ज्ञान परखने के लिए गणित का सवाल हल करने को कहा, गुरुजी बोले भरी अदालत में हिचक रहा हूँ। जज साहब ने गुरुजी के तर्क को सुना ओर आगे आदेश दिया 'चलो गाय पर निबंध लिखकर बताओ' गुरुजी बगलें झाकने लगे...... ओर गाय पर एक शब्द भी नहीं लिख पाये। माननीय जज ने फेसला सुनाया  'कलंक है ऐसे गुरु! इस भारत भूमि पर, राज्य सरकार जल्द ही एक कमेटी गठित कर ऐसे सभी अध्यापको को चिन्हित कर तुरंत प्रभाव से सेवा बर्खास्त कर दे।"

मेरे अखबार पाने की खुशी तुरंत ही रंज में बदल गयी, फिर भी मुझे बच्चों के साथ न्याय होने पर शंका है क्योंकि देश का कानून अँधा है और उसके हाथ लम्बे है, अंधेपन के कारण उसके लम्बे हाथ कई बार मुज़रिम की गर्दन पकड़ने के बजाये उसकी जेब में चले जाते है

No comments:

Post a Comment